Plumber Niranjan Pradhan

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Ulunda, Sonepur (Subarnapur), Western ODISHA, India

Saturday, 29 April 2017

Insaan ki badalta soch

*"नहा कर गंगा में  सब पाप धो  आया ...*
*वहीं  से  धोये  पापों  का  पानी  भर  लाया ....*

वाह  रे इन्सान  तरीका  तेरा  समझ नहीं  आया...

*"पाप हमारी सोच से होता हैं,*
          *शरीर से नही*
                *और*
        *तीर्थों का जल,*
*हमारे शरीर को साफ करता हैं,*
       *हमारी सोच को नही।"*

*ग़लती नीम की नहीं*
            *कि वो कड़वा है

*ख़ुदगर्ज़ी जीभ की है*
        *जिसे मीठा पसंद है ।

        
🙏🏻आपका दिन मंगलमय हो!🙏🏻

Wednesday, 8 March 2017

D

मेरे लफ्ज़ मेरी आवाज़ मेरी पहचान तुझ से है,
मेरा दिल मेरा अरमान मेरी तो जान तुझसे है💕
भला कोनसा ऐसा अक्स
                     मेरी ज़िन्दगी का बाकी है बता
मेरा गुरुर मेरी शान मेरा तो ईमान तुझ से है...💕

Wednesday, 22 February 2017

Life is beautiful

तू जिंदगी को जी, उसे समझने की कोशिश न कर...
सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,
                      उसमे उलझने की कोशिश न कर...
चलते वक़्त के साथ तू भी चल,
                      उसमे सिमटने की कोशिश न कर...
अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले,
               अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर...
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे,
          खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर...
कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे,
            सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर...
जो मिल गया उसी में खुश रह,
         जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर...
रास्ते की सुंदरता का लुत्फ़ उठा,
          मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर...

Monday, 13 February 2017

DQ

हर फूल को रात की रानी नही कहते, हर किसी से दिल की कहानी नही कहते. मेरी आँखों की नमी से समझ लेना, हर बात को हम जुबानी नही कहते.

Monday, 21 November 2016

Shayri kamal ke

कमाल है ना! आँखे तालाब नहीं, फिर भी, भर आती है! दुश्मनी बीज नही, फिर भी, बोयी जाती है! होठ कपड़ा नही, फिर भी, सिल जाते है! किस्मत सखी नहीं, फिर भी, रुठ जाती है! बुद्वि लोहा नही, फिर भी, जंग लग जाती है! आत्मसम्मान शरीर नहीं, फिर भी, घायल हो जाता है! और,इन्सान मौसम नही, फिर भी, बदल जाता है!…..

Saturday, 19 November 2016

Best friends forever

पूछे जो कोई कौन हूँ मै, कह देना कोई ख़ास नहीं, एक दोस्त हूँ सीधा सादा सा, जिसमे है कोई बात नहीं, मिल जाता हूँ आते जाते, है ऐसी कोई मुलाक़ात नहीं, हूँ एक बहुत आम सा ज़ामी, इसकी कोई बिसात नहीं, न भी मिलूं तो चलता है, मिलने की कोई प्यास नहीं, है ये रिश्ता बहुत ही छोटा, इस रिश्ते से तो कोई आस नहीं, बतला देना मुझे बेगाना, कह देना विश्वास नहीं, हूँ में राही पल दो पल का, कोई जीवन भर का साथ नहीं, पूछे कोई तुमसे......👫👩👬👨👭👧👫 याद आ जाता हूँ कभी कभी, दिल में होने जैसी याद नहीं, चल देता हूँ हर डगर पर साथ तुम्हारे, हमसफ़र जैसा फिर भी कोई साथ नहीं, जब रोती हों आँखें पी लेता हूँ हर आंसू, पर रिश्ते जैसी कोई बात नहीं, फिर भी पूछे कोई कौन हूँ में, कह देना इसकी कोई जात नहीं, एक दोस्त हूँ चलता फिरता सा, जिसमे कुछ भी बात नहीं याद करता हे हर रोज दिन तो दिन रही जिस रोज याद न करे ऐसा कोई भी रात नहीं । -:- Niranjan_pradhan -:-