आहिस्ता चल ज़िन्दगी,
कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है।
तेरी दौड़ भागते-भागते मैं थक गया हूं,
दम तो लेने दे,
कुछ दर्द मिटाना बाकी है।
मेरे अपने पीछे छूट गए,
कुछ फ़र्ज़ निभाना बाकी है…!!!
Plumber Niranjan Pradhan
- Niranjan Pradhan Plumber
- Ulunda, Sonepur (Subarnapur), Western ODISHA, India
Saturday, 18 November 2017
Nonstop zindagi
Thursday, 2 November 2017
Who has found the secret of life?
कभी धूप कभी छाया है
कभी सत्य कभी माया है
बीत रही इस जिंदगी का राज़ किसने पाया है ?
कभी आस कभी विश्वास है
खुशदिल है कभी उदास है ,
महफ़िलों में नजर नहीं आती है
तन्हाई में दुश्मन जैसे पास है,
कभी हंसाया है इसने जी भर कर हमें
और कभी जी भरकर रुलाया है,
बीत रही इस जिंदगी का राज किसने पाया है ?
किसी के लिए सरताज है जिंदगी
कभी दो वक़्त की रोटी की मोहताज है,
कोई रो-रो कर निकाल रहा है
किसी के लिए एक बिंदास अंदाज है
जिंदगी कोई ठोकरों से टूट गया है
देखो किसी ने दूसरों की जिंदगी को सजाया है
इस बीत रही जिंदगी का राज किसने पाया है ?
नफरत की आग लिए दिल में जलते रहते हैं
कई लोग और कुछ खुशियों की दवाई बाँटते रहेते हैं मिटाने को ग़मों के रोग,
जिंदगी ने अपने रूप से हमें इस तरह से मिलाया है,
इस बीत रही जिंदगी का राज किसने पाया है?
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Wednesday, 27 September 2017
Photo of Niranjan Pradhan
एक बार कुछ पत्रकार और फोटोग्राफर गांधी जी के आश्रम में पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि गांधी जी के तीन बंदर हैं। एक आंख बंद किए है, दूसरा कान बंद किए है, तीसरा मुंह बंद किए है। एक बुराई नहीं देखता, दूसरा बुराई नहीं सुनता और तीसरा बुराई नहीं बोलता। पत्रकारों को स्टोरी मिली, फोटोग्राफरों ने तस्वीरें लीं और आश्रम से चले गए।
उनके जाने के बाद गांधी जी का चौथा बंदर आश्रम में आया। वह पास के गांव में भाषण देने गया था। वह बुराई देखता था, बुराई सुनता था, बुराई बोलता था। उसे जब पता चला कि आश्रम में पत्रकार आए थे, फोटोग्राफर आए थे, तो वह बड़ा दुखी हुआ और धड़धड़ाता हुआ गांधी के पास पहुंचा।
सुना बापू, यहां पत्रकार और फोटोग्राफर आए थे। बड़ी तस्वीरें ली गईं। आपने मुझे खबर भी न की। यह मेरे साथ बड़ा अन्याय किया है बापू।'
गांधी जी ने चरखा चलाते हुआ कहा, 'जरा देश को आजाद होने दे बेटे! फिर तेरी ही खबरें छपेंगी, तेरी ही फोटो छपेगी। इन तीनों बंदरों के जीवन में तो यह अवसर एक बार ही आया है। तेरे जीवन में तो यह रोज-रोज आएगा।'
[दुर्भाग्य से आज इन्ही चौथे बंदरों का ज़माना है]
Journalism is the father of social media...!!!
Thursday, 21 September 2017
Happy Navraatri
नवरात्रि की पहली रात और Democracy Development की First stage आप सभी को मुबारक हो दोस्तों ।
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जय माता जी ,
Sunday, 28 May 2017
My collection
*बेटे भी घर छोड़ जाते हैं😔😔
जो तकिये के बिना कहीं...भी सोने से कतराते थे... आकर कोई देखे तो वो...कहीं भी अब सो जाते हैं...
खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं...
अपने रूम में किसी को...भी नहीं आने देने वाले...
अब एक बिस्तर पर सबके...साथ एडजस्ट हो जाते हैं...
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!! 😔
घर को मिस करते हैं लेकिन...कहते हैं 'बिल्कुल ठीक हूँ'...
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले...अब कहते हैं 'कुछ नहीं चाहिए'...
पैसे कमाने की जरूरत में...वो घर से अजनबी बन जाते हैं
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं।😔
बना बनाया खाने वाले अब वो खाना खुद बनाते है,
माँ-बहन-बीवी का बनाया अब वो कहाँ खा पाते है
कभी थके-हारे भूखे भी सो जाते हैं।
लड़के भी घर छोड़ जाते है।😔
मोहल्ले की गलियां, जाने-पहचाने रास्ते,
जहाँ दौड़ा करते थे अपनों के वास्ते,,,
माँ बाप यार दोस्त सब पीछे छूट जाते हैं
तन्हाई में करके याद, लड़के भी आँसू बहाते है😥
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं😥
नई नवेली दुल्हन, जान से प्यारे बहिन- भाई,
छोटे-छोटे बच्चे, चाचा-चाची, ताऊ-ताई ,
सब छुड़ा देती है साहब, ये रोटी और कमाई।
मत पूछो इनका दर्द वो कैसे छुपाते हैं,
बेटियाँ ही नही साहब, बेटे भी घर छोड़ जाते हैं😥
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Saturday, 29 April 2017
Insaan ki badalta soch
*"नहा कर गंगा में सब पाप धो आया ...*
*वहीं से धोये पापों का पानी भर लाया ....*
वाह रे इन्सान तरीका तेरा समझ नहीं आया...
*"पाप हमारी सोच से होता हैं,*
*शरीर से नही*
*और*
*तीर्थों का जल,*
*हमारे शरीर को साफ करता हैं,*
*हमारी सोच को नही।"*
*ग़लती नीम की नहीं*
*कि वो कड़वा है
*ख़ुदगर्ज़ी जीभ की है*
*जिसे मीठा पसंद है ।
🙏🏻आपका दिन मंगलमय हो!🙏🏻
Wednesday, 8 March 2017
D
मेरे लफ्ज़ मेरी आवाज़ मेरी पहचान तुझ से है,
मेरा दिल मेरा अरमान मेरी तो जान तुझसे है💕
भला कोनसा ऐसा अक्स
मेरी ज़िन्दगी का बाकी है बता
मेरा गुरुर मेरी शान मेरा तो ईमान तुझ से है...💕
Wednesday, 22 February 2017
Life is beautiful
तू जिंदगी को जी, उसे समझने की कोशिश न कर...
सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,
उसमे उलझने की कोशिश न कर...
चलते वक़्त के साथ तू भी चल,
उसमे सिमटने की कोशिश न कर...
अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले,
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर...
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे,
खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर...
कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे,
सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर...
जो मिल गया उसी में खुश रह,
जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर...
रास्ते की सुंदरता का लुत्फ़ उठा,
मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर...