Plumber Niranjan Pradhan

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Ulunda, Sonepur (Subarnapur), Western ODISHA, India

Friday, 30 November 2018

Silence life

एक चुप सौ सुख

एक मछलीमार काँटा डालकर तालाब के किनारे बैठा था ! काफी समय बाद भी कोई मछली काँटे में नहीं फँसी, ना ही कोई हलचल हुई , तो वह सोचने लगा... कहीं ऐसा तो नहीं कि मैंने काँटा गलत जगह डाला है, यहाँ कोई मछली ही न हो ! उसने तालाब में झाँका तो देखा कि उसके काँटे के आसपास तो बहुत-सी मछलियाँ थीं ! उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि इतनी मछलियाँ होने के बाद भी कोई मछली फँसी क्यों नहीं ?
एक राहगीर ने जब यह नजारा देखा , तो उससे कहा ~ लगता है भैया ! यहाँ पर मछली मारने बहुत दिनों बाद आए हो ! अब इस तालाब की मछलियाँ काँटे में नहीं फँसतीं मछलीमार ने हैरत से पूछा
क्यों ... ऐसा क्या है यहाँ ?
राहगीर बोला ~ पिछले दिनों तालाब के किनारे एक बहुत बड़े संत ठहरे थे ! उन्होने यहाँ मौन की महत्ता पर प्रवचन दिया था ! उनकी वाणी में इतना तेज था कि जब वे प्रवचन देते तो सारी मछलियाँ भी बड़े ध्यान से सुनती !
यह उनके प्रवचनों का ही असर है , कि उसके बाद जब भी कोई इन्हें फँसाने के लिए काँटा डालकर बैठता है , तो ये मौन धारण कर लेती हैं !
जब मछली मुँह खोलेगी ही नहीं , तो काँटे में फँसेगी कैसे ? इसलिए ... बेहतर यहीं होगा कि, आप कहीं और जाकर काँटा डालो ।

परमात्मा ने हर इंसान को दो आँख, दो कान, दो नासिका, हर इन्द्रिय दो-दो ही प्रदान करी हैं , लेकिन जिह्वा एक ही दी है !
क्या कारण रहा होगा ?
क्योंकि यह एक ही अनेकों भयंकर परिस्थितियाँ पैदा करने के लिये पर्याप्त है !
संत ने कितनी सही बात कही है , कि,
जब मुँह खोलोगे ही नहीं , तो फँसोगे कैसे ?
ऐसे ही, जो,
अगर इन्द्रिय पर संयम करना चाहते हैं , तो,इस जिह्वा पर नियंत्रण कर लो  तो, बाकी सब इन्द्रियाँ स्वयं नियंत्रित रहेंगी !
यह बात हमें भी अपने जीवन में उतार लेनी चाहिए !

Wednesday, 21 November 2018

Work is worship work is god

शब्द तो यदा-कदा
चुभते ही रहते हैं सबके,
जब  ...
मौन चुभ जाए किसी का
तो  सम्भल जाना चाहिए..!

Sunday, 4 November 2018

Freedom fighter

Western Odiaha

ON 05/11/2018 BY NIRANJAN PRADHAN @PLUMBER

#Election2019 hi dega separetion.
mera soch hi apko sochne mein mazboor kar dega. ishiliye niche tak padh lena.
khelne ko toh bahut hi khel hai yeh #rajniti kya chiz hai.

Bharat humare #mata hai toh humare pita koun hai. orissa? oye MAA SAMALESWARI Mahakali ka Avtar hai. Ye mat puchna ki #Mahakal koun hai. humare #sambalpuri bhasha hi humare matru bhasha hai #ORIYA nehi.
orissa just a state of #INDIA 
#STATE is western language.
humare #WESTERN_ODISHA ki bhasha main #RAEJ bolte hain.
we want to separate state in India #KOSHAL_PRADESH
orissa get separated befor india independent

{ P=N×D=N/P=F+M=U+A=N }


Atomic symbols
P= pradhan, pattanayak, pradhan, #pri_minister
N= niranjan, navin niranjan
D= dharmendra , doughter
N= narendra, niranjan
P= plumber, pradhan, pri minister
F= father
M= Mother, modi
U= uncle
A= Aunty
N= niranjan, Nephew
last & fast it’s me NIRANJAN PRADHAN

Saturday, 18 November 2017

Nonstop zindagi

आहिस्ता चल ज़िन्दगी,
कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है।
तेरी दौड़ भागते-भागते मैं थक गया हूं,
दम तो लेने दे,
कुछ दर्द मिटाना बाकी है।
मेरे अपने पीछे छूट गए,
कुछ फ़र्ज़ निभाना बाकी है…!!!

Thursday, 2 November 2017

Who has found the secret of life?

कभी धूप कभी छाया है
कभी सत्य कभी माया है
बीत रही इस जिंदगी का राज़ किसने पाया है ?

कभी आस कभी विश्वास है
खुशदिल है कभी उदास है ,
महफ़िलों में नजर नहीं आती है
तन्हाई में दुश्मन जैसे पास है,
कभी हंसाया है इसने जी भर कर हमें
और कभी जी भरकर रुलाया है,
बीत रही इस जिंदगी का राज किसने पाया है ?

किसी के लिए सरताज है जिंदगी
कभी दो वक़्त की रोटी की मोहताज है,
कोई रो-रो कर निकाल रहा है
किसी के लिए एक बिंदास अंदाज है
जिंदगी कोई ठोकरों से टूट गया है
देखो किसी ने दूसरों की जिंदगी को सजाया है
इस बीत रही जिंदगी का राज किसने पाया है ?

नफरत की आग लिए दिल में जलते रहते हैं
कई लोग और कुछ खुशियों की दवाई बाँटते रहेते हैं मिटाने को ग़मों के रोग,
जिंदगी ने अपने रूप से हमें इस तरह से मिलाया है,
इस बीत रही जिंदगी का राज किसने पाया है?
🕧🕐🕜🕑🕝🕒🕞⏰🕓🕟🕔🕠🕕🕡🕖

Wednesday, 27 September 2017

Photo of Niranjan Pradhan

एक बार कुछ पत्रकार और फोटोग्राफर गांधी जी के आश्रम में पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि गांधी जी के तीन बंदर हैं। एक आंख बंद किए है, दूसरा कान बंद किए है, तीसरा मुंह बंद किए है। एक बुराई नहीं देखता, दूसरा बुराई नहीं सुनता और तीसरा बुराई नहीं बोलता। पत्रकारों को स्टोरी मिली, फोटोग्राफरों ने तस्वीरें लीं और आश्रम से चले गए।

उनके जाने के बाद गांधी जी का चौथा बंदर आश्रम में आया। वह पास के गांव में भाषण देने गया था। वह बुराई देखता था, बुराई सुनता था, बुराई बोलता था। उसे जब पता चला कि आश्रम में पत्रकार आए थे, फोटोग्राफर आए थे, तो वह बड़ा दुखी हुआ और धड़धड़ाता हुआ गांधी के पास पहुंचा।

सुना बापू, यहां पत्रकार और फोटोग्राफर आए थे। बड़ी तस्वीरें ली गईं। आपने मुझे खबर भी न की। यह मेरे साथ बड़ा अन्याय किया है बापू।'

गांधी जी ने चरखा चलाते हुआ कहा, 'जरा देश को आजाद होने दे बेटे! फिर तेरी ही खबरें छपेंगी, तेरी ही फोटो छपेगी। इन तीनों बंदरों के जीवन में तो यह अवसर एक बार ही आया है। तेरे जीवन में तो यह रोज-रोज आएगा।'

[दुर्भाग्य से आज इन्ही चौथे बंदरों का ज़माना है]

Journalism is the father of social media...!!!

Thursday, 21 September 2017

Happy Navraatri

नवरात्रि की पहली रात और Democracy Development की First stage आप सभी को मुबारक  हो दोस्तों ।
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जय माता जी ,